सोमवार, 3 जुलाई 2017

बुलबुल रानी


"सुनो-सुनो ओ बुलबुल रानी
नहीं करेंगे हम शैतानी ।
जरा हमें घोंसला दिखादो,
समझो नहीं इसे मनमानी।"

"बोलो कहाँ-कहाँ से चुन कर
तिनके तुम लाती हो ।
उनको जाँच परख कर ही तुम ,
नीड़ बनाती हो ।
कितने दिन में पूरा कर लेती हो
इसे सयानी ।"

बुलबुल बोली----" देखो ,
लेकिन घर है अभी अधूरा।
तिनके बस दो-चार लगेंगे
हो जायेगा पूरा ।
फिर इसमें अण्डे सेयेंगे
हफ्ता भर दिन-रात लगेंगे
नन्हे-नन्हे प्यारे मुन्ने फिर
इसमें चहकेंगे
तब तुम सुन पाओगे उनकी
चीं..चीं.चींss---सुहानी ।"

"बुलबुल जी यह घर प्याली सा
होगा कहाँ गुजारा ।
नन्हे कैसे खेलेंगे
गायेंगे तुन-- तुन तारा
धक्का-मुक्की कर झगड़ेंगे
याद करोगी नानी ।"

बुलबुल बोली-"उन्हें घोंसले में 
रहना है तब तक ।
खुद उड़ने चुगने लायक बस
हो ना जाते जब तक ।
फिर बोलो ---क्या मुझे पड़ी जो
याद करूँगी नानी ।"
"समझ गये हम बुलबुलरानी

तुम हो बड़ी सयानी ।"

1 टिप्पणी:

  1. गिरजा जी नमस्कार आज बहुत दिनोबाद ब्लॉग में आन हुआ ..बहुत सुन्दर बाल कविता है ..

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